Sunday, September 5, 2010

मुंह का निवाला

गरीबों का निवाला
सरकार के कुप्रबंधन का यह हाल है कि जिसके चलते गरीबों के मुंह का निवाला छिनता रहा । नौकरशाही हर साल गरीबों के अनाज सड़ा देती है । सरकारी लापरवाही का यह हाल है कि पिछले कई दसकों मे करोड़ो रुपए का अनाज को खुले मे रखा गया, जिससे धूप और बारिश से आनाज सड़ गये।
यूपीए की सरकार ने इघर तो वर्षो से अनाजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बहुत बढ़ा दिया । इस कारण किसानो नें अपना गेंहू और चावल केंद्रीय सरकार की एजेंसियों को बेचा. इससे इतना अघिक अनाज हो गया कि उसे रखने कि जगह कम पड़ गई और रख रखाव के अभाव मे आनाज सड़ते चले गये । इस तरह कड़ोडो टन अनाज जब सड़ जाता है तो उसे या तो समुo मे या कqM+s कs ढ+sर मे फेंक दिया जाता है । अगर यही अनाज वी. पी. एल काड धारको एवं गरीबों में वांट दिया जाता तो बहुत से गरीबों को अपने जान से हाथ न धोना पड़ता ।

Saturday, September 4, 2010

देशवयापि महंगाई

देशवयापि महंगाई
देशवयापि महंगाई से चारो ओर हाय तोवा मचा हुआ है। जनता परेशान है, लेकिन वे कया करे, किससे कहेँ क या उन नेताओ.सांसदो से जिनहे उनहोने चुन कर भेजा ,आज तक वे खुद हि अपना पेट नह् भर पाये तो जनता कि कै।न चिंता करे ,दुसरी तरफ घोटालो पे घोटाले । पहले केंदिय कमचारियो के फिर राज कमचारियो के वेतन बढे. फिर सामानो के दाम बढे. ये तिनो मिला कर सांसदो का वेतन भी तिगुना बढाना ही चाहिए, संसद ने जोर दार आवाज उठाया, और उनका वेतन तिगुना करने का विल पास भी हो गया। ठिक चुनाव से पहले यही जनपतिनिघियों दवरा भरे जाने वाले जानकारियों के अनुसार ये सब के सब जनपतिनिघियाँ कड़ोड़पति हैं। जो धन इस जनता के गाढ़ि कमाई का एक हिससा है । इन जनपतिनिघियों मे से इकका दुकका को छोड़ कर किसी ने भी वेतन तिन गुना करने का विरोध नही किया, और करे भी .किंऊ इससे यह साफ हो जाता है, यह जनपतिनिघियाँ समाज के इसी जनता से वोट ले , चुनाव जित कर फिर से अपना भला करने मे जुट जाएगें ।